Wednesday, June 14, 2023

मेरी उत्तराखंड यात्रा (भाग 1)

उत्तराखंड की एक आकर्षक यात्रा में सभी पाठकों का स्वागत है, उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। मेरे साथ जुड़ें क्योंकि हम एक उल्लेखनीय यात्रा करने वाले हैं। यह यात्रा लुभावने परिदृश्यों, मनोरम किंवदंतियों और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण यात्रा  होगी।

दिन 1: दिल्ली से ऋषिकेश।

6 मई 2023 को हमारा सफ़र शुरू होता है दिल्ली से। दिल्ली में हमने एक टैक्सी करी जो हमें पूरा उत्तराखण्ड घुमा कर वापस दिल्ली पहुंचा देगी। दिल्ली से हमने शानदार मथुरा एक्सप्रेसवे से गुजरते हुए अपनी यात्रा शुरू की। इस रास्ते में अनेक शानदार ढाबे मिलते हैं, इन्हीं मे से एक ढाबे में हमने दोपहर का भोजन किया और आगे बढ़ चले। हमने अपना पहला रात्रि विश्राम ऋषिकेश में किया। ऋषिकेश में हमने गढ़वाल मण्डल विकास निगम के होटल मे एक रूम लिया।

दिन 2: ऋषिकेश से त्रियुगीनारायण 

दूसरे दिन अर्थात 7 मई 2023 को हम सुबह-सुबह 5:30 बजे ही अपने आगे के सफर पर निकल गए। अब हमारी उत्तराखंड की रोमांचक यात्रा ऋषिकेश से शुरू होती है, जिसे "योग नगरी" भी कहा जाता है। ऋषिकेश को पीछे छोड़ते हुए हम आगे की ओर बढ़ते हैं। क्योंकि हम ऋषिकेश से सुबह जल्दी ही निकाल गए थे तो हमने नाश्ता नहीं किया था। इस कारण हमने थोड़ा आगे जाकर ब्यासी में चाय पी और स्वादिष्ट, गर्मागरम आलू के पराठों का आनंद लिया। नाश्ता करके थोड़ी ऊर्जा लेकर अब हम निकाल पड़े अपनी आगे की यात्रा पर। गंगा नदी के प्रवाह के साथ-साथ गुजरते हुए हम देवप्रयाग पहुँच गए। देवप्रयाग में अलखनंदा और भागीरथी नदियों का संगम होता है। यहीं से दोनों नदियाँ मिलकर पवित्र गंगा नदी का निर्माण करतीं हैं जो ऋषिकेश की तरफ़ जाती है। इस विहंगम संगम को देखकर सभी यात्री और श्रद्धालु आत्मविभोर हो जाते हैं। अलखनंदा और भागीरथी का यह पवित्र संगम अद्भुत और अतिसुंदर है। 

                                               देवप्राग, अलकनंदा और भागीरथी का संगम

हम अपनी यात्रा जारी रखते हैं और इन सांप के जैसी टेढ़ी-मेढ़ी सड़कों से आगे बढ़ते हुए, श्रीनगर से गुज़रते हुए (जी हाँ उत्तराखंड में भी एक श्रीनगर है) रुद्रप्रयाग (जहाँ कि अलखनंदा और मंदाकिनी नदियों का संगम है) होते हुए अगस्त्यमुनि पहुँचे। अगस्त्यमुनि से थोड़ा आगे जाकर हमने एक और ब्रेक लिया और पेट पूजा की।

अगस्त्यमुनि के पास सोढ़ी गाँव में नदी के बीच में एक विशाल शिला दिखायी देती है जिसे सतडूँगू कहा जाता है। जब पाँडव स्वर्गारोहण के लिए हिमालय जा रहे थे तो वे यहाँ से गुज़रे थे। आगे बढ़ते समय उनका सत्तू (भूने हुए जौ, मक्का या/और चने का आटा) का थैला यहीं छूट गया। यह सतडूँगू शिला उनका वही सत्तू है। 2013 में जब केदारनाथ का बाढ़ का पानी यहाँ आया तो उसने बड़े-बड़े पत्थरों को बहा दिया लेकिन यह शिला जरा भी नहीं हिली और वैसी की वैसी ही खड़ी रही। आप सब हैरान हो गये होंगे ना, उत्तराखंड को देवभूमि ऐसे ही थोड़ी कहा जाता है। यहाँ पग-पग पर आपको देवताओं विराजमान होने के प्रमाण मिलेंगे।

                                                  सतडूँगू                                                                                                                                                      

आगे बढ़ते हुए हमने पहाड़ी फल हीसूल का आनंद उठाया। हीसूल पहाड़ी बेरी होती है जो पीले रंग की होती है और बहुत मीठी होती है। अपने हाथ से हीसूल तोड़ कर खाने में बहुत मज़ा आया।                                                             हीसूल

अब यहाँ से आगे बढ़ते हुए गुप्तकाशी, रामपुर, सीतापुर होते हुए हम सोनप्रयाग पहुँचे। सोनप्राग से एक रास्ता केदारनाथ जाता है और एक रास्ता त्रियुगिनारायण की ओर जाता है। सोनप्रयाग में आपको ट्रेफिक जाम का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि केदारनाथ यात्रा के लिए गाड़ियों का आखिरी पड़ाव सोनप्रयाग ही है। 

हम गाड़ियों की लंबी कतार को पार करते हुए अपने गंतव्य त्रियुगिनारायण पहुँच गये। हम सुबह जल्दी ही निकाल गये थे तो, त्रियुगिनारायण भी बहुत जल्दी अर्थात दोपहर के 3 बजे ही पहुँच गये। हमने होटल पहले से ही बुक कर लिया था इसलिए हमारा खोजबीन का समय बच गया और हम तुरंत ही मंदिर में दर्शन करने चले गये। मंदिर में पुजारी जी ने हमसे पूरे विधि-विधान से पूजा करवायी।

                                                          त्रियुगिनारायण मंदिर                                                                                                               
त्रियुगिनारायण मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। स्वयं विष्णु भगवान इस विवाह के साक्षी थे। विष्णु भगवान के वामन अवतार का जन्म इसी स्थान पर हुआ था इसलिए त्रियुगिनारायण में विष्णु भगवान के वामन अवतार की पूजा की जाती है। इस कारण से त्रियुगिनारायण का धार्मिक और एतिहासिक महत्व है।                                                                                                                                                                                       जल्दी पहुँचने का ये फायदा हुआ की 4 बजे विधि-विधान से पूजा करने के बाद हमें शाम की आरती में सम्मिलित होने का भी अवसर मिल गया। आरती के बाद हमने अपने होटल में ही पहाड़ी भोजन "चौसा-भात" का आनंद लिया। मौसम ठंडा होने और दिनभर की थकान के कारण हमें जल्दी ही नींद या गई। इस तरह हमारी उत्तराखंड यात्रा का दूसरा दिन समाप्त हुआ।                                                                                                                                आपसे जल्दी ही मिलेंगे मेरी उत्तराखंड यात्रा के दूसरे भाग में 


Friday, May 31, 2019

एक माँ की ताकत




       
   सुबह के 8 बज रह थे मधुरा अपने रसोई के काम समेट कर निधि के कमरे में जाती है, निधि अभी तक सो रही थी।

“निधि उठो कॉलेज नहीं जाना क्या"? मधुरा ने निधि को झकझोरते हुए कहा।
“माँ अभी 8 ही तो बजे हैं, कॉलेज 10 बजे शुरू होते हैं" निधि ने अलसाते हुए कहा।
“अरे तो क्या सीधे 10 बजे ही उठेगी? तैयार नहीं होगी?” चल अब जल्दी से उठ जा मधुरा ने गुस्से से बोला।

"आजकल के बच्चे समय की कीमत समझते ही नहीं हैं" मधुरा बड़बड़ाते हुए अपने बेडरूम में गई।
“सुनिये, जल्दी तैयार होकर बाहर आ जाईये नाश्ता टेबल पर रखा है, ठंडा हो जाएगा"। मधुरा ने प्रकाश को बोला।

“आता हूँ बीवी आता हूँ" कहते हुए प्रकाश बाहर आकर नाश्ता करना चालू कर देता है। "वाह पराँठे तो बड़े मस्त हैं, निधि नाश्ता नहीं करेगी क्या?” प्रकाश ने पूछा।
"तुम्हारी लाड़ली अभी तक मज़े से सो रही है, कॉलेज का समय हो रहा है लेकिन उसे कोई चिंता ही नहीं है" मधुरा ने जवाब दिया।

“अरे ठीक है यही तो दिन हैं उसके मज़े करने दो, बाद में तो उसे भी मेरे और तुम्हारे तरह काम में व्यस्त हो जाना है" प्रकाश ने मुसकुराते हुए कहा।
“तुम उसे लाड़ में बिगाड़ दोगे" मधुरा बोल ही रही थी कि निधि बाहर आते हुए बोली- "लो उठ गई, मिल गई शाँति?”

“हाँ हाँ ठीक है अब नाश्ता कर ले और जल्दी से तैयार हो जा" मधुरा बोली।

“नहीं माँ आज कॉलेज में हड़ताल है तो आज हम लोग फिल्म देखने जायेंगे" निधि ने जवाब दिया।
   अब मघुरा को गुस्सा आ गया और वो ज़ोर से बोली "क्या? फिर से हड़ताल! ये लोग कॉलेज पढ़ने के लिये जाते हैं या लड़ने के लिये, जब देखो तब हड़ताल।

  इस बार प्रकाश ने जवाब दिया "सही तो है, अपने अधिकारों के लिये लड़ना तो चाहिये ही"
"ठीक है ठीक है करो अपने मन की" मधुरा बड़बड़ाते हुए अपने काम में लग गई, प्रकाश ऑफिस और निधि तैयार होने चली गई।

   इसी तरह कुछ दिन बीत गए, लेकिन मधुरा को निधि के व्यवहार में कुछ अंतर नज़र आ रहा था। एक रात को उसे प्रकाश बात की "सुुनो, निधि कुछ गुमसुम सी नहीं लग रही है? पहले जैसी हंसती खिलखिलाती नहीं है और अब मुझसे बहस भी नहीं करती"।

  प्रकाश ने हँसते हुए कहा "कमाल है जब वो बहस करती थी तब भी तुम नाराज़ होती थीं और अब वो बहस नहीं कर रही है तब भी तुमको बुरा लग रहा है, एसा कुछ नहीं है पढ़ाई का तनाव है और कुछ नहीं निश्चि़त होकर सो जाओ।

   परंतु मधुरा को नींद नहीं आ रही थी। उसने मन ही मन में सोचा कल निधि से अवश्य पूछूँगी क्या बात है।

   दूसरे दिन सुबह प्रकाश के ऑफिस जाने के बाद मधुरा निधि के पास गई और उससे पूछा "निधि बेटा तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है क्या? इतनी गुमसुम क्यों हो?”
"नहीं माँ कुछ नहीं सब ठीक है" निधि ने सकपकाते हुए कहा।

  निधि बहुत देर तक टालमटोल करती रही, फिर मधुरा ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा "निधि अपनी माँ को नहीं बताओगी क्या हुआ"। 
निधि अपनी माँ के गले लग कर फफक कर रो पड़ी और बोली "माँ हमारे केमेस्ट्री के सर हैं ना" बोलते हुए निधि अचानक रूक गई।
"बोल बेटा क्या किया तेरे केमेस्ट्री के सर ने”- मधुरा ने पूछा। 

"माँ कल उन्होने मुझे लैब में बुलाया मेरे डाउट सॉल्व करने के लिये और मुझे इधर ऊधर हाथ लगाने लगे, मुझे बहुत गंदा लगा मैं वहाँ से भाग गई लेकिन ऊन्होने धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो मुझे फेल कर देंगे।" कह कर निधि फूट फूट कर रोने लगी।

  मधुरा गुस्से से काँप रही थी, उसने रोती हुई निधि के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा "ना मेरी बच्ची तेरी माँ है ना, तू बिल्कुल भी मत डरना।
  उसी दिन मधुरा ने ये बात प्रकाश को बताई, प्रकाश गुस्से में चिल्ला उठा "मैं उसकी जान ले लूँगा, उसने मेरी बेटी को हाथ कैसे लगाया"।
“हाँ प्रकाश, हम कल ही कॉलेज जाकर प्रिंसिपल से शिकायत करेंगे।"- मधुरा ने बोला । 
  प्रकाश शाँत होते हुए बोला "मधुरा इस बात को और नहीं बढ़ाना चाहिये, बदनामी हमारी ही होगी, निधि को भी बोलो भूल जाए और उस सर से दूर रहे"

“ये क्या कह रहे हो प्रकाश?” मधुरा आँखे फाड़ कर बोली। "उसने हमारी बेटी के साथ जो किया वो भूल जाएँ, उसे सज़ा नहीं दिलवाएँ, क्या हुआ तुम्ही ने कहा था ना अधिकारों के लिये लड़ना सही है?”
"वो सब दूर से ही सही लगता है, लेकिन याद रखो इससे कुछ होने वाला नहीं है बदनामी हमारी ही होगी, इसलिये तुम दोनो जितना जल्दी हो सके इस बात को भूलने की कोशिश करो.” प्रकाश गुस्से से बोला और सो गया। लेकिन मधुरा की तो नींद उड़ चुकी थी।

  दूसरे दिन सब लोग चुपचाप थे लेकिन मधुरा मन अशाँत था, प्रकाश के जाते ही वह निधि को लेकर प्रिंसिपल के पास पहुँची और उसे पूरी घटना बता दी। प्रिंसिपल को बहुत गुस्सा आया वो बोला "आप चिंता मत किजिये हम सर को समझा देंगे लेकिन इसे आप और मत बढ़ाइये, कॉलेज की बदनामी हो जायेगी।"

   मधुरा समझ गई कि प्रिंसिपल कुछ नहीं करेगा। वो चुपचाप घर चली आई।
प्रकाश बोला "देखा मैने कहा था न कुछ नहीं होगा"।
लेकिन मधुरा हार नहीं मानने वाली थी आकिर वो एक माँ थी और बेटी का दर्द माँ ही समझ सकती है।
   धीरे धीरे पता चला कि निधि अकेली नहीं थी कई और लड़कियों के साथ उस सर ने दुर्व्यवहार किया था लेकिन बदनामी के डर से सब चुप रहे।

  मधुरा ने सोच लिया कि उसे क्या करना है। मधुरा ने पहले एक व्हाट्एप ग्रुप बनाया और धीरे धीरे निधि की सारी सहेलियों और फिर कॉलेज के कई विद्यार्थियों के माता-पिता को ग्रुप में जोड़ लिया, फिर सबको धीरे धीरे समझाना शूरू किया किया कि निधि के साथ जो हुआ है वो कई लोगों के साथ हुआ है और अगर इस सर को सज़ा न दिलवाई तो औरों के साथ भी ये हो सकता है।

  देर से ही सही पर धीरे धीरे करके सारे अभिभावक मान गए। फिर एक दिन सब लोग मिल कर प्रिंसिपल के पास पहुँचे और प्रिंसिपल से कहा कि अगर केमेस्ट्री सर के किलाफ कोई कार्यवाही नहीं की तो हम सब आपके विरूद्ध भी शिकायत कर देंगे तथा मीडिया और सोशल मीडिया में आपकी सारी कहानी बयान कर देंगे।

  अब प्रिंसिपल डर गया और अभिभावकों की जीत हुई। केमेस्ट्री सर को कॉलेज से निकाला ही नहीं गया बल्कि पुलिस के हवाले भी कर दिया गया साथ ही साथ प्रिंसिपल को भी उसके उदासीन रवैये की सज़ा मिली।

  जब सब घर आये तो निधि माँ के गले लग के खूब रोई और बोली- "माँ तुम कितनी बहादुर हो, मैं समझती थी तुम सारा दिन घर में रहती हो तो तुम कुछ जानती ही नहीं हो पर माँ मुझे तुम पर गर्व है कि मैं तुम्हारी बेटी हूँ"।

   प्रकाश ने भी मधुरा की तारीफ करते हुए कहा "हाँ मधुरा मैने भी हार मान ली थी पर तुमने संघर्ष किया और जीत भी गईं। सच में माँ बेटी का रिश्ता ही एसा होता है, सबसे अलग"। पूरे कमरे हँसी खिलखिलाहट की आवाज़ गूँजने लगी।

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Sunday, May 12, 2019

Arunachal Pradesh



Introduction

Arunachal Pradesh belongs to the North East region of India. 


“Arunachal:  Arun means dawn and Anchal means zone or area so Arunachal means area or zone with beautiful lights of dawn”.  True to its name mountains of Arunachal Pradesh is filled with the beautiful lights of dawn. Its borders are connected to three countries, China, Bhutan, and Myanmar.  Arunachal Pradesh borders the states of Assam and Nagaland.


            The capital of Arunachal Pradesh is Itanagar and Itanagar is the largest city in the state.

Arunachal Pradesh has 25 districts with a total population of 1,382,611 its official language is English. Arunachal Pradesh is situated  between 26.28° N and 29.30° N latitude and 91.20° E and 97.30° E longitude and the total area is 83,743 km2


Arunachal Pradesh is surrounded by beautiful mountains with amazing flora and fauna. This state has a wide range of subtropical forest that increases the beauty of this Enchanting state. 36 major tribes and more than 306 sub-tribes are here and most of them know Hindi.


Places to visit in Arunachal Pradesh/Tourist places in Arunachal Pradesh:

Tourist places in Arunachal Pradesh are divided into 12 circuits and each of them is distinguished by its unique culture, biology, and food. Though there are many places to visit here some of the famous tourist places in Arunachal Pradesh are

1)Tawang

2)Itanagar

3)ziro

4)Bomdila

5)Bhaluk and

6)Roing


Tawang

  

Tawang is "The birthplace of Dalai Lama" and has many amazing and beautiful monasteries and picturesque sceneries. Tawang is mainly known for its importance to Buddhist monks. Tawang monastery is the most popular one and sacred for Buddhists.


Itanagar

Itanagar is home to decades and centuries-old tribal culture and heritage which are still in their original form. The ITA Fort of the 15th century, Ganga lake, and Buddha Vihar declared sacred by the Dalai Lama are among the most visited tourist places in Arunachal Pradesh.


Ziro

ziro is the paradise for trackers and piece-seeking people Ziro is home to the native Apa Tani tribe.

Bomdila

Bomdila is also known as Himalaya's Varanda. because you can get stunning views of Snow covered Himalayan mountain range and especially of the Kangto and Gorichen peaks.


Bhalukpuog


Bhalukpuog is a refreshing place where tourists can experience many adventure sports you can get a glimpse of Exotic Birds along with Tigers elephants and barking deer.


Roing

Roing is one of the important tourist places in Arunachal Pradesh. Snow-filled mountains, deep gorges turbulent rivers various waterfalls quiet and calm lakes archaeological sites are some of the many attractive tourist places in Roing.


Things to do in Arunachal Pradesh:


As this is a hilly area so there are many adventurous things to do in Arunachal Pradesh like river rafting, hiking, trekking, and fishing also. Tourists can visit many wildlife centuries and see a glimpse of various exotic birds, tigers, elephants, and many more animals.

Experience Wildlife:

Tourists who are fond of wildlife must visit National Parks and wildlife sanctuaries, where they can see tigers, leopards, clouded leopards, and snow leopards in its jungles.

If you are a bird watcher you can go to the Sangti Valley,

 where you can see e lots of species of birds like White Winged Wood Duck, Bengal Florican, Temmincks Tragopan, Mishmi Wren, and Sclater’s Monal, etc.


Do Adventure sports:

If you love adventure sports, you must do White water rafting as Arunachal Pradesh has many rivers with intense flow which make river rafting an unusual experience.

For an unconventional adventure, you can go camping, angling, and trekking.

Some famous trekking routes are Bomdila-Seppa, Along-Mechuka, Daporijo-Taksing, Pasighat-Tuting, Pasighat-Mariang, Daporijo-Along, and Bomdila-Daimara-via-Ramlingam and Chakku. 

And for fishing tourists can catch fish, especially trout and Mahseer.


Visit Temples and Monasteries:

Tourists can visit many historical and religious places like temples and monasteries. Tawang Monastery is the largest in India and the second-largest monastery globally.



How to reach Arunachal Pradesh

By Air:

Arunachal Pradesh does not have any. Lilabari in Assam is the nearest airport to Itanagar which is 2 hours drive by bus or taxi

By Train:

Hartmuti train station in Assam is the nearest to the state capital Itanagar. Tourists can easily hire a bus or taxi from Hartmuti train station (Assam) to Arunachal Pradesh.

By Road:

Arunachal Pradesh is easily accessible by road from many neighboring cities and towns. A sufficient number of buses are available from the major towns of this state to Meghalaya, Assam, and Nagaland.


Best Time to Visit:

For summer vacations April to June is the perfect time to visit Arunachal Pradesh with pleasant weather and temperature from 200c to 350c.


For monsoon lovers July to September is the ideal time to visit Arunachal Pradesh temperature resides between 18°c - 29°c, however, it is not advisable to visit Arunachal Pradesh during monsoon due to heavy rainfall and landslide landslides

For winter vacations October to March is the best time to visit here as the temperature falls between 8°c - 14°c and this is the ideal time to visit this state.


So above is some information about Arunachal Pradesh, pack your bags and explore this beautiful North East state of India.













Thursday, February 9, 2017

politics on demonitisation a satire


"I have written this comedy skit for class 4 school children"
14th Jan 2017
Monia - "Happy Makad Sakad Aunty" to all Indians!

Maun Maun  Singh(MMS)-  Madamji  it’s “Makar Sankranti” Not "Makad Sakad Aunty".

Monia- oh  oh! Sorry Maun Maun Ji please wish them on my behalf as I am not feeling well.

MMS- Madam Ji! what happened why are you so nervous?

Monia- this is not sudden Maun Maun ji I am not feeling well since the day Rs 500 and Rs 1000 notes were banned . Still remember that day………

……….. (flashback)…………

8th Nov 2016 (8:00pm)

Modi- “MITRON”…… we have decided that five hundred and one thousand notes presently in use will no longer be legal tender from midnight tonight. (आज रात 12 बजे से 500 और 1000 रुपये के नोट नहीं चलेंगे )        

Monia- No … No ... No !  This is a violation of fundamental rights….

Modi- What? Which fundamental right has been violated by this Monia Ji?

Monia- Fundamental right of freedom of movement…

Modi- Who has been stopped to move by this?

Monia – Notes of 500 & 1000 Rupee. You have been stopped moving 500 & 1000 Rupee notes to move from one to another person.

MMS to Modi- Now you know why Pappu is so dumb…

Modi- Sigh! Yes now I know why Pappu is so dumb. Ok Monia Ji! Don’t worry, this freedom of movement for Rs. 500 & 1000 is not violated absolutely, you can move these notes from your home to your bank account!

Monia- Grrr! That’s horrible, where is Pappu?

Pappu-(in a queue outside a bank) See how Modi Ji is harassing the people of India, I am waiting outside the bank since long day to deposit this money see........what? just Rs. 4000/-?.......b..but I had brought lots of money…..how only 4000/- left in my pocket? Oh! …..there is hole in my pocket….see how poor I am, even my kurta is ripped, there is a hole in my pocket of my kurta. Modi Ji has done this…..

Modi- What!? When did I ripped your kurta?     
                 
Pappu- Some reporters are saying…. By this demonetization Modi has attacked common man’s pocket .  So this is why my pocket has a hole.

Modi- Sigh! Pappu baba! Why don’t you take mentos…. “Mentos khaao dimaag ki batti jalaao”. By the way attacked on pocket is just a saying, don’t take it literally and since when have you become a common man?

(Suddenly Khujlimal appears shouting)

Khujlimal- Who said “common man!” only I can say common man, I am the owner of common man party.

(then  finally a common man speaks between this ga ga)

Common man- Khujlimal Ji! Calm down…..Modi Ji is talking about common public not your party.
Khujlimal- So what? Modi is doing conspiracy against my party by using this word …. I only care about common man party..Uhh! I mean common man, you tell me are you not tired of standing in long queue?

Common man- Yes … but…..

Khujlimal- See! The common man is in serious problem. He is taking all the harassment because of Modi. Modi is responsible for his sadness. Modi….Modi….Modi……

Common man- Mr. Khujlimal! Please stop your khujli… I mean stop blabbering. I said I am tired but I am not sad. I am happy that some one thought about a common man’s problem “corruption”.

Khujlimal- No!  No!  No!  how can you say that you common man!  I am the owner of common man party, you will say what I will tell you.  See, this common man is lying…he said because he is scared of Modi.  Modi forced him to say so. Modi is responsible. Modi….Modi……Modi…..

Common man-  Sigh!  This man will never stop taking Modi’s name. well he has nothing to do, but I am a real common man, I have lots of things to do. I should not waste my time with him, I better move on and  
              Yes! despite all problems of less cash and long queue I am happy by the demonetization. At least someone took a step to stop corruption. Only corrupt are scared and they are only 10%, 90% of Indians are honest and happy by this decision.

            Thank you Modi Ji!


Jai Hind!

Monday, April 14, 2014

चुनावी माहौल और नेताओं की वाणी

         अपने मध्यकाल की ओर बढ़ रहा वर्ष 2014 अन्य बातों के अलावा राजनीति के भयावह वैचारिक प्रदूषण, ईर्ष्या, नफरत और जहरीले बयानों के लिए भी याद किया जाएगा. बेशक यह समयकाल सोलहवीं लोकसभा के गठन के लिए हो रहे संघर्षों, ज्यादातर राजनीतिक दलों के वैचारिक दीवालियेपन की भी याद दिलाएगा, साथ ही यह भी कि कैसे भारत का मतदाता (चाहे वह युवा, प्रबुद्ध वर्ग से हो या फिर मजदूर, किसान, व्यापारी, नौकरीपेशा या उद्यमी) एक चाय बेचने वाले ‘स्वप्नद्रष्टा’ के पीछे आ खडा हुआ. इस महासंग्राम के नतीजे जो भी हों (क्योंकि ये पंक्तियाँ चुनाव नतीजे आने से पहले लिखी गयी हैं) मगर एक बात बहुत साफ़ है कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. आगे भी होगा, इसकी गारंटी नहीं. इस आधुनिक काल में तकनीकी संसाधनों का इतना सुनियोजित इस्तेमाल पहली बार देखने को मिला. शायद यही वजह रही कि हम आसानी से यह भी जान सके कि देश के विकास के लिए किसकी क्या रणनीति है, कौन सा नेता किसको कितने भद्दे तरीके से गरिया रहा है, किसके मन में कितना जहर भरा है और कौन कितना गिर चुका है. एक तरफ गुजरात की अनुकरणीय कामयाबी के आत्मविश्वास से लैस नरेंद्र मोदी देश को सुखद भविष्य के सपने दिखाते मिले तो दूसरी तरफ वे ताकतें उन्हें पानी पी पीकर गाली देती रहीं जिन्हें इस देश समाज की तनिक भी फ़िक्र नहीं, केवल सत्ता प्राप्ति से मतलब है. ऐसे नेताओं के लिए उनका कुनबा ही देश और समाज है. उसी के भले के लिए वे मरे जा रहे हैं.
          जरा नमूने देखें. शुरुआत होती है कुछ माह या साल पहले जब देश की सबसे पुरानी पार्टी (माफ़ कीजिये, उसे अब पार्टी कहने में भी शर्म आती है क्योंकि वह भी अब घोर परिवारवाद की गिरफ्त में है) ने नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कहा, वह भी एक नहीं बार बार. और जब मोदी ने परिवारवाद के मोह से ग्रसित महारानी के पुत्र को शहजादा कहा तो मानो भूचाल आ गया. मोदी पर हमले और तेज हो गए, लेकिन यह बात ज्यादातर लोग समझ रहे थे कि आखिर मोदी उसे और क्या कहते भला. खैर, यह तो कुछ ख़ास नहीं. चुनावी पारा चढ़ा और जिन्हें अपनी हार साफ़ दिखने लगी वे तो बौरा ही गए. एक पार्टी है (उसे कुनबा कहें तो ज्यादा सही रहेगा) समाजवादी पार्टी. समाजवाद से दूर दूर तक कोई मतलब नहीं. खुद साम्प्रदायिकता और जातिवाद के सहारे सत्ता में बैठे इन लोगों को मोदी का विकासवाद रत्तीभर नहीं भाया. वे लगे जहर उगलने. आजम खान जैसा आदमी मोदी को कुत्ते के पिल्ले का बच्चा कह बैठा और विडम्बना देखें कि उसे अपनी कथनी पर जरा भी शर्म नहीं. 
             इसी पार्टी के मुखिया मौलाना मुलायम तो चार कदम और आगे निकल गए. ऐसे-ऐसे बयान दे रहे हैं कि छंटा हुआ बदमाश भी शरमा जाये। अभी हाल ही में नेताजी अर्थात सपा के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने बलात्कार के बारे में बयान दिया. कह बैठे कि लड़के तो लड़के हैं, गलतियाँ हो जातीं हैं, तो क्या उन्हें फांसी पर चढ़ा देंगे. उन्हें फ़ांसी की सज़ा देना गलत है. सच तो यह है कि इस तरह का बयान देकर ‘नेता जी’ ने निकृष्टता की सारी सीमाएं पार कर दीं. गरज सिर्फ इतनी थी कि चुनाव का माहौल उनके पक्ष में हो जाए. हालांकि जब पासा उल्टा पड़ता दिखा तो लगे सफाई देने और कहने लगे, मैंने ऐसा थोड़े ही कहा था. हद तो तब हो गयी जब नेताजी की ही पार्टी का महाराष्ट्र प्रतिनिधि अबू आजमी एक कदम और बढ़ गए और महिलाओं के खिलाफ विष वमन किया. गनीमत यह रही कि अबू के बेटे और बहू ने उनके बेहूदा बयान से द्दोरी बनाने में ही भलाई समझी. समाज के जिस घिनौने अपराध के खिलाफ सारा देश एकजुट है, जिस जघन्य अपराध को रोकने के लिए दिल्ली मे इतना बड़ा आंदोलन चला, उसे कितनी सरलता से नेताजी ने झुठला दिया। क्या यही सम्मान है नारी का इन नेताओं के मन में? ऐसा कोई वाकया नेताजी के घर की किसी महिला के साथ हुआ होता तो भी नेताजी उसे गलती घोषित करते? सवाल यह भी है कि यह सब बकवास करके नेताजी किनका वोट प्राप्त करना चाह रहे हैं? बलात्कारियों का? इसमें शक नहीं कि ऐसे ही कुत्सित और निर्लज्ज विचारधारा वाले लोगों के कारण बलात्कार की घटनाएँ बढ़ी हैं. कोई भी यह जानकार स्तब्ध रह जाएगा कि महिलाओं के लिए दुनिया के सबसे असुरक्षित देशों में भारत चौथे नम्बर पर है. राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि देश में औसतन हर दो घंटे में बलात्कार की दो घटनाएं होती हैं. देश में सालाना 25 हजार से ज्यादा बलात्कार के मामले दर्ज होते हैं. औसतन रोजाना बलात्कार के 50 मामले दर्ज हो रहे हैं. 20 वर्षों में दोगुनी हो गयी हैं बलात्कार की घटनाएं. बलात्कार के 44.5 प्रतिशत मामले अकेले यूपी, एमपी और महाराष्ट्र में सामने आए. यह तब है जबकि एक आकलन के अनुसार देश में महिला उत्पीडन के 90 प्रतिशत मामले दर्ज ही नहीं होते. अब कोई नेताजी से पूछे, भईया क्या हो रहा है यह सब. मुझे तो लगता है, इन विकृत, दुर्बुद्धि वाले नेताओं को ही पहले सजा देनी चाहिये। नेताओं को भी सबक मिलेगा और बलात्कारियों को भी।
खैर...आइए आजम खान के एक और बयान पर गौर करें. हाल ही में उन्होंने फरमाया कि करगिल की लड़ाई मुसलमान सैनिकों के कारण जीती गयी है हिन्दू सैनिकों के कारण नहीं। मैंने जब ये सुना तो पहले कानों पर विश्वास नहीं हुआ. लगा अप्रैल फ़ूल अभी भी बनाया जा रहा है, आखिर अप्रैल अभी खत्म तो हुआ नहीं है। लेकिन जब कई समाचार पत्रों मे पढ़ा तब जाकर विश्वास हुआ, मन किया कि सर पीट लूँ अपना. अरे भाई अब मात्र सैनिक ही तो बचे हैं हमारे देश मे जो अपना काम बिना लालच के, बिना जात-पात के भेदभाव के बड़ी मेहनत और ईमानदारी से कर रहे हैं। आपने इन्हें भी हिन्दू मुसलमान के तराज़ू में तोल दिया। अच्छा हुआ नेताओं के परिवार वाले सेना में नहीं हैं, वरना ये लोग वहाँ भी जात-पात का खेल चालू कर देते।
खैर ये हुआ एक बयान, इससे पहले काँग्रेस के एक नेता ने बयानबाज़ी की कि वो मोदी के टुकड़े-टुकड़े कर देगा। तो भाई कोई इनसे ये पूछे कि ये चुनाव लड़ रहे हैं या दंगा कर रहे हैं या फ़िर फ़िल्मी लड़ाई लड़ रहे हैं जिसमें नायक या खलनायक बड़बोलापन करता है कि मैं तेरे टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा। हद हो गयी। खैर इस बयान के लिये महाशय ने जेल की हवा खा ली ये अच्छा रहा। कांग्रेस के ही एक नेता बेनी प्रसाद वर्मा भी बौराए हुए हैं. कभी मोदी को डैंजरस डॉग कह देंगे तो कभी डैंजरस कैट. क्या तमाशा है भाई. हद तो यह है कि चुनाव आयोग ने अभी उन पर लगाम नहीं लगाई है,
मैं पूछना चाहती हूँ सभी नेताओं से कि क्या आपने चुनाव आचार संहिता नाम की किसी वस्तु का नाम कभी सुना है, अगर सुना है तो क्या कभी उसको पढ़ा भी है। जिस तरह की भाषा आप लोग जनता के सामने उपयोग कर रहे हैं ऐसी भाषा क्या आप आपके अपनों के सामने भी प्रयोग मे लाते हैं. अगर नहीं तो जनता के सामने क्यों ऐसी भाषा बोल रहे हैं? इसका अर्थ ये है कि जो जनता आपको वोट दे रही है आप उसे अपना नहीं समझते हैं, तो फ़िर ये जनता आपको वोट क्यों दे? और भैया अगर आप आपके अपनों के सामने भी ऐसी ही भाषा प्रयोग करते हैं तब तो ये प्रार्थना है कि आप जैसे नगीनों से भगवान हमारे देश को बचाये रखे।
तो हे आदरणीय नेतागणों! कृपा करो इस देश, देश की जनता, देश की सभ्यता पर, और जोश में कुछ भी बोलने से पहले होश करके सोच लिजिये कि कहीं आपके बयानों की वजह से आप चुनाव जीतने के बजाय अपनी मिट्टी ही पलीद न करा लें. क्योंकि ये पब्लिक है पब्लिक बाबू, ये सब जानती है और समझती है। इसलिये आपकी भी समझदार बनने में ही भलाई है, समझे!


(मैं सादर आभार प्रकट करती हूँ वरिष्ठ पत्रकार श्री राम अनूप द्विवेदी जी का कि उन्होंने मेरे लेख का संपादन करके उसमे आवश्यक बातें जोड़ के उसे सुन्दर बना दिया)

Saturday, October 19, 2013

खज़ाने का स्वप्न

     
           साथियों स्वप्न देखना हर मनुष्य के लिये साधारण बात है, बचपन से हम सब सपना देखते हैं कुछ ना कुछ बनने का या पाने का। फ़िर हम सब जुट जाते हैं अपने उन सपनों को साकार करने में। कुछ सपने सच होते हैं कुछ नहीं। वैसे ये हमारे प्रयास के ऊपर भी निर्भर है, कि हम कितना प्रयास करते हैं अपने सपनों को सच करने का। किन्तु हमे स्वयं ही प्रयास करना पड़ता है अपने सपनों को सच करने का, हाँ हमारे परिवारजन, मित्रगण अवश्य हमारा साथ देते हैं हमारे सपनों को साकार कर्ने में परंतु प्रयास हमें स्वयं करना पड़ता है।
          साथियों आप सोच रहे होंगे कि आज ये सपनों को लेकर मैं क्यों बैठ गयी हूँ। तो आप सभी जानते हैं कि आजकल एक साधु का सपना बहुचर्चित है सारे देश में, कि एक स्थान पर खज़ाना गड़ा हुआ है। साथियों इस साधु ने खज़ाने के दबे होने का सपना क्या देख लिया…पूरी सरकार कूद पड़ी खज़ाना ढूँढ़ने में…बिना किसी प्रमाण के मात्र एक स्वप्न के आधार पर सरकार करोड़ों रुपया जो हमारे टेक्स से मिला है खर्च करने मे लग गयी।
          आजकल जिस तरह से एक साधु के सपने पर भरोसा कर के सरकार करोड़ों रुपये का जुआ खेल कर खुदाई कर रही है…इस बात से ये तो साफ़ हो गया सरकार को सोने कि बहुत ज़्यादा ज़रुरत है, वरना किसी के सपने पर विश्वास करके इतना खर्चा करने की बात गले नहीं उतरती है…क्योंकि जो सरकार राम के अस्तित्व पर शंका करती है जो राम सेतु के होने को नकारती है वही सरकार मंदिर के खजाने पर बडी सरलता से एक स्वप्न के आधार पर ही विश्वास कर लेती है
         मेरा तो मानना है कि हम की क्यों ना हम सब मिल कर एक-एक सपना देखें किसी किसान के खेत में खज़ाने के गड़े होने का… सरकार वहाँ अपने खर्चे पर खुदाई करा देगी…किसान का पैसा बच जायेगा…या फ़िर जहाँ कुँआ नहीं, तालाब नहीं है वहाँ खज़ाने के होने का सपना देखें…सरकार के खर्च पे कुआँ, तालाब फ़ौरन खुद जायेगा वो भी बिना किसी को रिश्वत खिलाये…वैसे प्यासे लोगों के लिये पीने का पानी किसी खज़ाने से कम नहीँ है…है ना???

मेरी उत्तराखंड यात्रा (भाग 1)

उत्तराखंड की एक आकर्षक यात्रा में सभी पाठकों का स्वागत है, उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। मेरे साथ जुड़ें क्योंकि हम एक उल्लेखनीय यात्रा ...